गड़े खजाने को खोजता समाज
By फ़ुरसतिया on October 18, 2013
खुदाई स्थल के आसपास मेले सा माहौल बन गया है। चाय की दुकाने खुल गयीं हैं, पकौड़ी छन रही हैं, जलेबी कड़ाही में तैरने लगीं हैं। खजाने के इंतजार में लोगों के हाल- अंखड़ियां झाईं पड़ी पंथ निहारि-निहारि टाइप हो रहे हैं। बाबा जी जब बोले हैं तो खजाना मिलेगा कईसे नहीं! मिलेगा तो है ही। बस समय की बात है। बाबाजी कोई गलत थोड़े ही बोलेंगे।
मजेदार है अपना देश। हजार टन सोना दबा के चले गये राजाजी। लड़ रहे थे अंग्रेजों के खिलाफ़। हजार टन सोना दबाये धरे रहे और पराये देश के हुक्मरान उनके ही देश के सिपाहियों को नौकर बनाकर उनको निपटाय दिेये। जित्ता सोना उनके पास था उत्ता अगर सिपाहियों को देकर अपनी फ़ौज में भर्ती कर लेते तो अंग्रेज डेढ़ दिन में निपटा के फ़ांसी पर न लटका न पाते।
डेढ़ सौ साल बाद बाबाजी के सपने पर खुदाई हो रही है। मिलता है कि नहीं यह तो समय बतायेगा। लेकिन यह सारा कुछ अपने लोगों के दीवालियेपन की कहानी है। सोचा जा रहा है कि सोना मिलते ही सब कुछ बल्ले-बल्ले हो जायेगा। पेट्रोल पांच रुपये लीटर मिलने लगेगा, अनाज दो रुपये किलो। मंहगाई देश बदर हो जायेगी, भुखमरी आत्महत्या कर लेगी। गैरबराबरी का नामोनिशान मिट जायेगा।
देश की सारी समस्यायें भुखमरी, मंहगाई बेचारी थरथर कांप रही हैं। इधर खजाना मिला नहीं उधर उनकी गरदन हलाक। नामोनिशान मिट जायेगा उनका देश से।
भ्रष्टाचार इस सबसे बेपरवाह किसी कोने में खड़ा मुस्करा रहा होगा। अगले घोटाले का नाम सोच रहा होगा- बाबा घोटाला, खुदाई घोटाला, खजाना घोटाला या फ़िर सपना घोटाला।
सोना मिलते ही जिस तरह तमाम समस्याओं के हल की बात कही जा रही है उससे लगता है कि भारतीय समाज के हाल मानसिक रूप में उस फ़टेहाल परिवार की तरह हो गये हैं जो घरैतिन के गहने कपड़े बेचकर समस्याओं के तात्कालिक हल खोजने के उपाय सोचता है।
खुदा न खास्ता अगर खजाना मिला तो सोना मिलते ही देश में हर विभाग में ’सपना बाबा’ की भर्ती चालू हो जायेगी। बाबा लोगों का काम सिर्फ़ सपना देखना होगा। सपने पर अमल करके विभाग फ़टाफ़ट कार्यवाही करेंगे। इनकम टैक्स वाले ’सपना बाबा’ छिपे हुये काले धन का सपना देखेंगे। कोयला मंत्रालय वाले ’सपना बाबा’ खोयी हुयी फ़ाइलों को। सेल्स टैक्स वाले बाबा ट्रकों में छिपाकर ले जाते सामान का सपना देखेंगे। फ़ौरन माल पकड़ा जायेगा। फ़ौज वाले ’सपना बाबा’ बंकर में बैठकर सपना देखेंगे और बतायेंगे कि घुसपैठ किधर से हो रही है। बन्दूकें किधर ताननी हैं। किसी घपले की बात चलेगी तो बाबाजी बुलाये जायेंगे। बाबा जी सपना देखकर बतायेंगे कि घपला हुआ है कि नहीं? बाबा कहेंगे हुआ है तब FIR दर्ज होगी। नहीं तो नहीं। लोग हल्ला मचायेंगे कि घपला हुआ है भाई । ये देखो सबूत। लेकिन उनको जबाब दिया जायेगा – अरे भाई सबूत सब ठीक है लेकिन जब बाबाजी को सपना नहीं आया घपले का तो कैसे मान लिया जाये गड़बड़ी हुई है। कैसे लिख लें FIR? जाओ भागो, सोने दो।
देश के विश्वविद्यालयों में सपने के पाठ्यक्रम लागू हो जायेंगे। सपने पर एम.ए., पी.एच.डी, होगी। सबसे बढिया सपना देखने वालने ’सपना बाबा’ को शेखचिल्ली सम्मान से नवाजा जायेगा। हर तरफ़ सपने ही सपने होगे। हकीकत की ऐसी-तैसी हो जायेगी।
पहले के महापुरुष समाज निर्माण का सपना देखने थे और अमल के लिये पुरुषार्थ की बात करते थे। आज के समाज में निठल्ले बाबा खजाने का सपना देख रहे हैं और पुरुषार्थी उसे खोदने के लिये पसीना बहा रहे हैं। हरामखोरी ने पुरुषार्थ को पटखनी दे दी है। पुरुषार्थ सर झुकाये निठल्ले की गुलामी कर रहा है।
साभार-फुरसतिया ब्लॉग
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