Monday, 31 August 2020
भवानी प्रसाद
covid
भारत भर के ज्यादा से ज्यादा डॉक्टरों ने गंभीर रूप से बीमार कोविड-19 रोगियों के लिए, आमतौर पर प्लाज्मा थेरेपी के रूप में जाना जाने वाली सामान्य प्लाज्मा थेरेपी निर्धारित करना शुरू कर दिया है. प्लाज्मा एक ऐसे व्यक्ति से लिया जाता है जो बीमारी से उबर गया हो क्योंकि उसमें रोग से लड़ने वाला एंटीबॉडी होते हैं. फिर इसे उसी बीमारी से ग्रस्त रोगी में प्रत्यारोपित किया जाता है जिसकी अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली एंटीबॉडी का उत्पादन नहीं कर रही है. सैद्धांतिक रूप से इससे रोगी में एंटीबॉडी प्रतिक्रिया शुरू हो जानी चाहिए. भले ही अतीत में अन्य संक्रामक रोगों के इलाज के लिए इस प्रणाली को एक चिकित्सा हस्तक्षेप के रूप में इस्तेमाल किया गया हो, लेकिन यह दर्शाने के लिए बहुत कम वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि यह कोविड-19 रोगियों की मदद करता है. भारत में प्लाज्मा उपचार प्रणाली के लिए अधिकांश नैदानिक परीक्षणों के परिणाम अभी तक जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन चीन में एक प्रमुख परीक्षण से पता चला है कि प्लाज्मा उपचार प्रणाली का रोगियों पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा था.
चूंकि दुनिया को इस बीमारी के बारे में पता चले अभी महज आठ ही महीने हुए हैं, इसलिए डॉक्टर अपने मरीजों को जीवित रखने के लिए प्लाज्मा और कई अन्य दवाओं को प्रायोगिक उपकरणों के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.
साभार कारवां पत्रिका