Monday, 31 August 2020

भवानी प्रसाद

मुझे कोई हवा पुकार रही है
कि घर से बाहर निकलो
तुम्हारे बाहर आए बिना
एक समूची जाति एक समूचि संस्कृति 
हार रही है

मुझे हवा पुकार रही है।

सोचता हूँ सुनने की शक्ति बची है
तो चल पड़ने की भी मिल जाएगी
अकेला भी निकल पड़ा पुकार पर
तो धरती हिल जाएगी।

भवानी प्रसाद

No comments:

Post a Comment