मुझे कोई हवा पुकार रही है
कि घर से बाहर निकलो
तुम्हारे बाहर आए बिना
एक समूची जाति एक समूचि संस्कृति
हार रही है
मुझे हवा पुकार रही है।
सोचता हूँ सुनने की शक्ति बची है
तो चल पड़ने की भी मिल जाएगी
अकेला भी निकल पड़ा पुकार पर
तो धरती हिल जाएगी।
भवानी प्रसाद
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